मोहम्मद दीपक…
कितनी खुशनसीब होगी वो बेटी,
जिसके पिता भीड़ के सामने
डर बनकर नहीं,
हिम्मत बनकर खड़े होते हैं।
कितनी नसीब वाली होगी वो बेटी,
जिसने अपने पिता को
नफ़रत के शोर में
इंसानियत की आवाज़ बनते देखा।
जब दुनिया कमजोरों पर चढ़ दौड़ती है,
तब उसका पिता
एक बुज़ुर्ग की दुकान के आगे
ढाल बनकर खड़ा हो जाता है।
उस बेटी ने आज यह नहीं देखा कि
उसके पिता कितने ताक़तवर हैं,
उसने यह देखा कि
उसका बाप कितना सच्चा इंसान है।
ऐसे पिता मिल जाएँ तो
बेटियों को दुनिया से डर नहीं लगता।
क्योंकि उन्हें पता होता है—
मेरा बाप ज़ुल्म के सामने कभी नहीं झुकेगा।
वाक़ई…
कितनी खुशनसीब होगी वो बेटी। 🥰💔❤️
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