upreme Court UGC Case: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा लागू की गई Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 अब केवल कॉलेज और विश्वविद्यालयों तक सीमित मुद्दा नहीं रह गया है।
छात्रों और शिक्षकों के विरोध के बाद यह प्रशासन और राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है। 27 जनवरी को ऊंची जाति के छात्रों ने UGC मुख्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन करने की योजना बनाई है। वहीं हाल ही में एक सिटी मजिस्ट्रेट और सत्तारूढ़ पार्टी के युवा नेता के इस्तीफे ने सरकार पर दबाव और बढ़ा दिया है।
UGC के नियम क्या कहते हैं?
नए नियमों का उद्देश्य कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में भेदभाव को रोकना और सभी छात्रों तथा कर्मचारियों को समान अवसर देना है। इसके तहत हर हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट को Equal Opportunity Centre बनाना होगा। भेदभाव से जुड़ी शिकायतों के लिए विशेष समितियां गठित करनी होंगी और 24 घंटे हेल्पलाइन भी चालू करनी होगी। तय समय में शिकायतों पर कार्रवाई करना अनिवार्य है। नियमों का पालन न करने पर UGC कार्रवाई या जुर्माना भी लगा सकता है।
विरोध के पीछे की वजहछात्र
और शिक्षकों का कहना है कि नियम अस्पष्ट और व्यापक हैं। आलोचक मानते हैं कि संस्थानों को अत्यधिक अधिकार दिए गए हैं, जिससे झूठे आरोपों से बचाव के लिए सुरक्षा पर्याप्त नहीं है। नियमों का असमान या गलत इस्तेमाल विभिन्न कॉलेजों में संभव है। इस वजह से कई राज्यों में छात्रों और शिक्षकों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई तय
UGC के नए नियमों के खिलाफ याचिका राहुल देवन और अन्य बनाम केंद्र सरकार के नाम से सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि ये नियम जनरल कैटेगरी के छात्रों के साथ भेदभाव कर सकते हैं। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने याचिका की तकनीकी खामियों को दूर करने के निर्देश दिए और मामले को औपचारिक सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आश्वासन दिया।
